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अगर आपकी आंखों के सामने आपके देश का भविष्य बीमार हो रहा हो, पागल हो रहा हो, चिड़चिड़ा हो रहा हो तो आप क्या करेंगे? जी हाँ दोस्तों, मैं बात कर रहा हूँ हमारे आपके घरों के बच्चों की और उनके खराब हो रहे स्वास्थ्य की जो इस देश का भविष्य हैं ।


दोस्तों, क्या आपने गौर किया है कि लॉकडाउन में आपके बच्चों के बर्ताव में पहले से बदलाव आया है। वैसे तो लॉकडाउन में समय बिताते हुए दो माह से ज्यादा वक्त हो चला है और बच्चे घर के नये माहौल में भले ढलते दिख रहे हैं पर लॉकडाउन का बच्चों के दिलो-दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

लंबे समय से घरों से बाहर नहीं निकलने की वजह से बच्चे बहुत परेशानी महसूस करने लगे हैं। लॉकडाउन लगने के पहले से ही बच्चों के स्कूल बंद हैं। वे अपने दोस्तों से भी नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते वे भी तनाव का शिकार हो रहे हैं।

तनाव बढ़ने से उनमें डिप्रेशन की समस्या भी पैदा हो सकती है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों को कोरोना के मानसिक दुष्प्रभाव से बचाने के लिए पेरेन्ट्स को खास तौर पर सजग रहना चाहिए और उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।

अगर बच्चा चिड़चिड़ा हो रहा है, ठीक से खा-पी नहीं रहा है और उसके सोने-जागने के समय में भी बदलाव दिख रहा हो, तो पेरेन्ट्स को सावधान हो जाना चाहिए।

डब्लूएचओ के मुताबिक बच्चे आजकल अपने अभिभावकों से लड़ाई और बहस करने लगे हैं और अभिभावक उन्हें डाँटते हैं या मारते हैं।


दोस्तों, डब्लूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन में बच्चों पर दुर्व्यवहार की घटनाएं बढ़ रही हैं। देशभर में लॉकडाउन के दौरान बच्चों पर शारीरिक, मानसिक हिंसा से जुड़ी घटनाएं बढ़ गईं।

चाइल्ड लाइन इंडिया (टोलफ्री नंबर - 1098) ने 20 से 31 मार्च के बीच देशभर में 3.07 लाख शिकायतें फोन के जरिए सुनीं। सुनीं, जिसमें 30% घरेलू दुर्व्यहार से जुड़ी थीं।


दोस्तों, ये बहुत ही गंभीर चर्चा का विषय है क्योंकि आपके बच्चे का स्वास्थ्य खतरे में है और भविष्य भी। आप सोच रहे हैं अचानक ऐसा क्या हो रहा है?

दोस्तों आज बहुत से लोग हैं जो आपके बच्चों को पागल बनाने में लगे हुए हैं। हम सब जानते हैं कि बच्चे हर नई चीज के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं और कुछ लोग इसी का गलत फायदा उठा रहे हैं।


आज मैं आपको कुछ पॉइंट बताऊंगा जो बहुत जरूरी है:


1) पहला पॉइंट है मोबाइल एंड कंप्यूटर गेम्स।

दोस्तों, गेम खेलना बहुत जरूरी है लेकिन ऐसा गेम जो आपके बच्चों की शारिरिक और मानसिक स्थिति को फायदा पहुंचाए जैसे भागदौड़ वाले गेम

जो खुले मैदान में खेला जा सके जैसे क्रिकेट, फुटबाल, बास्केटबॉल या कोई और गेम इससे आपके बच्चे का शारीरिक स्वास्थ्य तो अच्छा रहता ही है साथ ही साथ उसमें सामाजिक भावना का भी विकास होता है।

खेल आपके बच्चे की इम्युनिटी और बॉडी दोनों को स्ट्रांग बनाता है मगर ये मोबाइल और कंप्यूटर गेम्स आपके बच्चों पर ठीक इसका उल्टा असर डालते हैं।

मोबाइल और कंप्यूटर गेम खेलने से न सिर्फ उनकी आँख खराब हो रही है बल्कि मानसिक विकार भी पैदा हो रहे हैं।

आजकल रेसिंग गेम और शूटिंग गेम बच्चों को बहुत पसंद होते हैं और यही गेम आपके बच्चों के अंदर अग्रेशन(गुस्सा), फ्रस्टेशन, निराशा को जन्म देते हैं।

गेम हारने पर जब बच्चे को डिप्रेशन या डिस-सैटिस्फैक्शन महसूस होता है तो वो बार बार खेलता है जिससे उसका बहुत समय नष्ट होता है और जब जरूरी काम के लिए समय नहीं बचता और गेम में जीत भी नहीं मिलती तब उसके अंदर चिड़चिड़ापन घेर लेता है।

यही सब बातें आपके बच्चों को पागल बनाने के लिए काफी हैं।

एक बात और है कि आपने देखा होगा की आपके बच्चे लेटकर या गलत पोस्चर में गेम खेलते हैं तो ऐसे में उनके ऋण की हड्डी पर भी बुरा असर पड़ता है और साथ ही साथ मोटापा के भी शिकार हो जाते हैं।


2) दूसरा पॉइंट है इंटरनेट सुरक्षा पर नजर।

आजकल बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, डब्लूएचओ की सलाह है कि अभिभावक इस बात पर नजर रखें कि बच्चे कहीं इंटरनेट पर बुलीईंग का शिकार होने के खतरे पर तो नहीं हैं।

दोस्तों, ये घटना आजकल आम हो गयी है और इसका बच्चों पर बहुत ही ज्यादा नकारात्मक असर पड़ता है। सोशल मीडिया पर ज्यादा टाइम देना बच्चों के लिए काफी नुकसानदेह है।

सोशल मीडिया पर बुलीइंग के घटना कोई बड़ी नात नहीं है लेकिन आपके बच्चे के लिए ये एक चिंता का विषय हो सकता है।

स्थानीय साइबर सेल से भी आप शिकायत कर सकते हैं और अपने बच्चे से एक दोस्त की तरह जुड़कर भी आप इस समस्या से उसे बचा सकते हैं।


3) तीसरा पॉइंट है घर का सुरक्षित-स्वस्थ वातावरण

यूनिसेफ के मुताबिक, घर में बच्चे को बेहद स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी हैं। अगर इसमें से किसी एक चीज से भी समझौता हो रहा है तो बच्चे पर महामारी का असर गहरा होगा।

अभिभावक अपने बच्चे के व्यवहार पर विशेष ध्यान दें, देखें कि क्या बच्चा घर या किसी बाहरी व्यक्ति के प्रति अनावश्यक डर तो महसूस नहीं करने लगा है। घर में आमतौर पर अभिभावकों के बीच होने वाली नोक झोक भी बच्चों के मस्तिष्क पर बहुत बुरा असर डालती हैं।

4) चौथा पॉइंट है ऑनलाइन वीडियो और वेब सिरीज़।

दोस्तों, आजकल इंटरनेट पर ऐसे कंटेंट मौजूद है जो आपके बच्चे के मन को पूरी तरह से भटकाने के लिए काफी है और बचपन मे ही पागलों की मानसिकता है भर देंगे।

आजकल वेब सीरीज का दौर चल पड़ा है जो कि बच्चों के समय का नुकसान तो कर ही रह है बल्कि एडल्ट कंटेंट उनकी सोच को भी खराब कर रहा है और उनके बचपन को दूषित कर रहा है जिससे कम उम्र में ही बच्चों पर हारमोनल डिसबैलेंस का खतरा मंडराने लगा है।


दोस्तों, अब मैं आपको कुछ बातें बताऊंगा जो आपके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है और उनको पागल होने से बचा सकती है। अगर आप अपने बच्चों के भविष्य को लेकर वाकई में सजग हैं तो आपको आज से ही इन उपायों पर काम करना चाहिए।


1) पहली बात की आप अपने बच्चों के साथ समय बिताएं।

लॉकडाउन में पूरा परिवार घर में रहने को मजबूर है। हमेशा एक ही जगह पर रहने से किसी को परेशानी होने लगती है। बच्चों का स्वभाव ही ऐसा होता है कि वे एक जगह टिक कर नहीं रह सकते।

समझा जा सकता है कि इस हालत में उन्हें कितनी समस्या हो रही होगी। इसलिए बच्चों के साथ जितना ज्यादा संभव हो सके, वक्त बिताएं। इस दौरान उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि यह परिस्थिति हमेशा नहीं बनी रहेगी।


2) दूसरी बात की आप एक रूटीन बनाएं।

अगर आप बच्चों के लिए एक रूटीन बनाते हैं तो आपको इससे काफी फायदा हो सकता है। एक रूटीन रहने पर बच्चे उसे फॉलो कर सकते हैं। इससे उनमें जिम्मेदारी की भावना पैदा होती है।

बिना किसी काम के बच्चों का मन नहीं लगता। आप बच्चों के पढ़ने, खेलने, टीवी देखने और दूसरे कामों के लिए समय तय कर सकते हैं।


3) तीसरा सबसे महत्वपूर्ण पॉइंट है बच्चों को हेल्दी फूड दें।

लॉकडाउन में इस बात का ख्याल रखें कि बच्चों का खान-पान ठीक रहे। अक्सर बच्चे जब उदास होते हैं तो खाने-पीने पर ध्यान नहीं देते हैं। अगर बच्चे ठीक से नहीं खाते-पीते हैं तो उनकी इम्युनिटी कमजोर हो सकती है।

इसलिए उन्हें समय से खाना दें। हरी सब्जियां, दाल, दूध और फल जरूर उनके भोजन में शामिल करें।


4) चौथा सुझाव है कि बच्चों को एक्सरसाइज करना सिखाएं।

अक्सर बच्चों को एक्सरसाइज करने की जरूरत नही पड़ती है, क्योंकि दौड़-भाग करने में ही उनकी अच्छी-खासी एक्सरसाइज हो जाती है। लेकिन लॉकडाउन में बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी करीब-करीब बंद है।

इसलिए उन्हें एक्सरसाइज करने को कहें। आपको उन्हें यह बताना होगा कि वे कौन-सी एक्सरसाइज करें और कैसे करें।


5) पांचवी पॉइंट है कि आप अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दें।

स्कूल और ट्यूशन बंद रहने से अक्सर बच्चे पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते हैं। अगर वे लंबे समय तक किताबों से दूर रहे तो पढ़ाई में पीछे रह जा सकते हैं।

इसलिए उनकी पढ़ाई पर भी ध्यान देना जरूरी है। हो सके तो आप रोज उन्हें पढ़ने के लिए बैठाएं और यह देखें कि सिलेबस में उन्होंने कहां तक पढ़ाई पूरी कर ली है।

बच्चों के टीचर से भी फोन पर समय-समय पर संपर्क कर सकते हैं और बच्चों की उनसे बात करा सकते हैं।

दोस्तों, अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे, आपका परिवार और आपके दोस्त स्वस्थ रहें तो मिशन आरोग्यम से जुड़े रहें और ऐसी तमाम स्वास्थ्य संबंधित जानकारी पाने के लिए देखते रहें हमारा चैनल मिशन आरोग्यम।https://www.youtube.com/channel/UCrFVKk45x1_boNZxrv3uM7g